Monday, June 4, 2012

यूँ तो कबूल है सरमायेदारी तुम्हारी लेकिन
थोड़ी गुंजाईश मेरी ग़ुरबत की बचाए रखना 

Sunday, June 3, 2012


वो कहते हैं कि माशूक से तकरार ठीक नहीं 
एक हम हैं कि,खुदा से तकरार किये बैठे हैं  


उफ़ ! ये तेरी  ख़ामोशी कि अदा देखे कोई 
किसी के क़त्ल का सामान सजा रखा है

वे ज़माने के रिवाज थे जो इन पैरों कि जंजीर बने 
मैंने तो हंसना चाहा पर आंसू मेरी तकदीर बने !