Thursday, September 20, 2012


ये दिल के रिश्ते भी कुछ अजीब रिश्ते होते हैं
'कुछ नहीं' से कोई 'सब कुछ' बन जाता है
उल्फत नहीं,नफ़रत भी नहीं ,कह दिया तूने लेकिन
गर्दिश में काम आ सकूँ,इतना तो तुझसे नाता है !

Tuesday, July 24, 2012

मैं कल रात ही मुंबई से वापस आया हूँ ,जहां मैं 'इंडिया हेज गाट टेलेंट ' के आडिशन में गया था !वहां मैंने अपनी एक गजल सुनाई !अपनी ये गजल एक माह पहले मैंने फेसबुक पर पोस्ट की थी ! IGT के लिए मैंने उसमें एक नया अंतरा और शुरुआती 'शेर' और जोड़ा था ! कलर्स टीवी के क्रिएटीव टीम की दो युवा महिलायें आडिशन ले रही थीं ! शुरू का शेर सुना कर जैसे ही मैंने गजल शुरू की , एक जो वरिष्ठ थी ,मुझसे बोली, आप शेर पे शेर सुनते रहेंगे तो कैसे चलेगा ? कुछ गा कर सुनाइए ! मैंने कहा मैं सिंगर नहीं हूँ ,मैं कवि हूँ ,और गीत गजल लिखता हूँ !उसने कहा फिर भी ,कुछ तो गाकर सुनाइये !तो मैंने उन्हें गाकर सुनाया !उन्हें शायद मेरी गजल ज्यादा पसंद नहीं आई !उन्होंने मुझसे कहा की आपको फोन द्वारा सूचित किया जाएगा !देखें क्या होता है !मेरी वह गजल पेशे खिदमत है जो मैंने वहां सुनाई थी ..

कोई देता है आवाज मुझे, या बजता है कोई साज कहीं
क्यों तन-मन मेरा गूंजे है भीतर-भीतर दिन रात कहीं

जाने ये किसकी सदा
मेरे सपनों में आये
जैसे कोई मीठी लोरी
गा के मुझको सुनाये
जैसे हो ख्वाब सुनहरे
पलकों के साए साए
जैसे गुमनाम फ़रिश्ते
देते मुझको दुवाएँ
       जाने ये किसकी सदा
       मेरे सपनों में आये
हौले हौले बजती हो
जैसे मंदिर की घंटी
आसमान से उतरी हों
जैसे परियां सतरंगी
तारों की चुनर ओढ़े
घूँघट में चाँद छुपाये
नूर की बारिश जैसे
मेरा वजू कर जाए
     जाने ये किसकी सदा
     मेरे सपनों में आये
अनजानी राहों से
कोई मुझको पुकारे
अनहद के नाद गूंजे
अनलहक के गूंजे नारे
जैसे मीरा के घुंघरू
बजते हों संग इकतारे
जैसे जमुना किनारे
राधा, कान्हा पुकारे
     जाने ये किसकी सदा
      मेरे सपनों में आये
मेरे मन के आँगन में
जैसे उतरी हो गंगा
लहरों की कल कल गूंजे
मन लगे तीरथ जैसा
स्वप्नों के भस्म से उठकर
जैसे पंछी गायें
प्रेम फिर रूप संवारे
जैसे मेरे घर आये
    जाने ये किसकी सदा
    मेरे सपनों में आये ....
कोई देता है आवाज मुझे, या बजता है कोई साज कहीं
क्यों तन-मन मेरा गूंजे है भीतर-भीतर दिन रात कहीं !

Monday, June 4, 2012

यूँ तो कबूल है सरमायेदारी तुम्हारी लेकिन
थोड़ी गुंजाईश मेरी ग़ुरबत की बचाए रखना 

Sunday, June 3, 2012


वो कहते हैं कि माशूक से तकरार ठीक नहीं 
एक हम हैं कि,खुदा से तकरार किये बैठे हैं  


उफ़ ! ये तेरी  ख़ामोशी कि अदा देखे कोई 
किसी के क़त्ल का सामान सजा रखा है

वे ज़माने के रिवाज थे जो इन पैरों कि जंजीर बने 
मैंने तो हंसना चाहा पर आंसू मेरी तकदीर बने !

Friday, May 25, 2012

जाने ये किसकी सदा
मेरे सपनों में आये
जैसे कोई मीठी लोरी
गा के मुझको सुनाये
जैसे हो ख्वाब सुनहरे
पलकों के साए साए
जैसे गुमनाम फ़रिश्ते
देते मुझको दुवाएँ
         जाने ये किसकी सदा
          मेरे सपनों में आये
हौले हौले बजती हो
जैसे मंदिर की घंटी
आसमान से उतरी हों
जैसे परियां सतरंगी
तारों की चुनर ओढ़े
घूँघट में चाँद छुपाये
नूर की बारिश जैसे
मेरा वजू कर जाए
           जाने ये किसकी सदा
           मेरे सपनों में आये
अनजानी राहों से
कोई मुझको पुकारे
अनहद के नाद गूंजे
अनलहक के गूंजे नारे
जैसे मीरा के घुंघरू
बजते हों संग इकतारे
जैसे जमुना किनारे
राधा, कान्हा पुकारे
      जाने ये किसकी सदा
      मेरे सपनों में आये ...